FLN आधारित नवीन पाठ्यपुस्तक प्रशिक्षणSCERT Raipur दिनांक: 30 मार्च 2026 - Feedback सह दिनभर का सारांश


प्रथम सत्र
सत्र का प्रारंभ एक प्रेरणादायी सत्र से हुआ, जिसमें श्री जलतारे सर एवं श्री द्रोण सर द्वारा NEP 2020 के अनुरूप कक्षा के स्वरूप पर विस्तार से प्रकाश डाला गया। इस दौरान 21वीं सदी के कौशल-आधारित शिक्षण, शिक्षण में तकनीक के प्रभावी उपयोग, बहुभाषी शिक्षा, तथा शिक्षक की परिवर्तित भूमिका पर सारगर्भित चर्चा की गई।
   स्तर-आधारित शिक्षण (Level-based Teaching) की आवश्यकता पर विशेष बल दिया गया। साथ ही ‘डाउट क्लास’ एवं ‘प्रेजेंटेशन क्लास’ के महत्व को स्पष्ट करते हुए NEP 2020 में इनके संदर्भों को रेखांकित किया गया।
   अंततः Learning Pyramid के माध्यम से सीखने की प्रक्रिया को समझाया गया, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि सक्रिय सहभागिता के माध्यम से अधिगम अधिक प्रभावी होता है।

द्वितीय सत्र
इस सत्र में श्री वर्मा सर द्वारा सरस्वती वंदना, भोजन मंत्र एवं Vande Mataram का सामूहिक पाठ कराया गया, जिससे वातावरण में सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक भावनाओं का संचार हुआ।

तृतीय सत्र
इस सत्र में आदरणीय श्री राजपूत सर द्वारा नैतिक शिक्षा एवं संस्कारों के विकास पर विचार प्रस्तुत किए गए। उन्होंने विविध उदाहरणों एवं काव्यात्मक अभिव्यक्तियों के माध्यम से यह स्पष्ट किया कि संस्कार न केवल व्यक्तिगत विकास बल्कि पारिवारिक एवं सामाजिक जीवन के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।

चतुर्थ सत्र (हिंदी सत्र)
इस सत्र का संचालन श्री द्रोण सर, श्री बागवान सर, जोशी मैम, शुक्ला मैम एवं साहू मैम द्वारा किया गया। सत्र में हिंदी विषय के अंतर्गत निम्नलिखित पाँच उप-सत्रों का परिचय दिया गया:

1. पढ़ने की प्रक्रिया एवं उसके घटकों की समझ
2. भाषा पाठ्यपुस्तकों में कहानियों एवं गद्य विधाओं का अध्ययन
3. कविताओं के संदर्भ में पठन प्रक्रिया
4. प्राथमिक कक्षाओं में आकलन एवं पुनरावृत्ति
5. बहुकक्षा शिक्षण की प्रभावी रणनीतियाँ

(1) पठन प्रक्रिया एवं घटकों की समझ
सत्र की शुरुआत विचारोत्तेजक प्रश्नों से की गई, जैसे —
क्या पढ़ना केवल शब्दों का उच्चारण है?
क्या सुनकर समझना एवं पढ़कर समझना अलग प्रक्रियाएँ हैं?
   गतिविधि आधारित शिक्षण के अंतर्गत प्रतिभागियों को दो अनुच्छेद दिए गए, जिनके आधार पर प्रश्नों के उत्तर खोजने को कहा गया। अधिकांश प्रश्नों के उत्तर प्राप्त हुए, किन्तु एक विशिष्ट प्रश्न का उत्तर न मिल पाने पर विश्लेषणात्मक चर्चा की गई।
  अंत में SRG द्वारा पठन के सात प्रमुख आधार बिंदु बताए गए:
ध्वनि चेतना
अक्षर ज्ञान
शब्द पहचान
प्रवाह
शब्द भंडार
समझ
पूर्वानुमान एवं संदर्भ
  निष्कर्षतः यह स्थापित हुआ कि पढ़ना एवं समझना परस्पर अभिन्न प्रक्रियाएँ हैं, तथा समझ विकसित करना ही पठन का मुख्य उद्देश्य है।

(2) कहानी शिक्षण
प्रतिभागियों को समूहों में विभाजित कर दो कहानियों — “आसमान गिर रहा है” एवं “दोस्त के जूते” — पर कार्य करने हेतु कहा गया।
   गतिविधियों में अभिनय, प्रश्न निर्माण, वैकल्पिक शीर्षक, पात्र विश्लेषण, कहानी का विस्तार एवं ध्वनि/वर्ण पहचान जैसे अभ्यास शामिल थे।
  निष्कर्षतः यह सामने आया कि कहानी शिक्षण के प्रमुख उद्देश्य हैं:
भाषा विकास
शब्द भंडार वृद्धि
कल्पनाशक्ति का विकास
भावनात्मक संवेदनशीलता
समझ क्षमता का संवर्धन
    साथ ही आदर्श कहानी शिक्षण के लिए अभिनय, चित्र-चर्चा, प्रश्नोत्तरी, पूर्व अनुभव से जुड़ाव एवं लेखन गतिविधियों को आवश्यक बताया गया।

(3) कविता शिक्षण
  इस सत्र में कविता शिक्षण के उद्देश्यों एवं प्रक्रियाओं पर विस्तृत चर्चा की गई। प्रतिभागियों को “बया हमारी चिड़िया रानी” एवं “चिड़िया का गीत” पर आधारित गतिविधियाँ दी गईं।
  गतिविधियों में नई पंक्तियों का सृजन, प्रश्न निर्माण, भावानुभूति, तथा कविता से संबंधित कहानी लेखन शामिल था।
चर्चा के प्रमुख बिंदु:
कविता को समझने में लय एवं अभिनय की भूमिका
केवल पठन बनाम अनुभवात्मक अधिगम
सुनकर एवं पढ़कर समझने में अंतर

कविता शिक्षण के प्रमुख उद्देश्य:
भाषा सौंदर्य का अनुभव
शब्द भंडार विकास
मौखिक अभिव्यक्ति
कल्पनाशक्ति
भावनात्मक विकास
समझ क्षमता

प्रभावी रणनीतियाँ:
लयबद्ध पठन
हाव-भाव एवं अभिनय
चित्र-चर्चा
पुनर्पाठ
रचनात्मक लेखन

(4) आकलन एवं पुनरावृत्ति
सत्र की शुरुआत प्रश्नों से की गई —
क्या आकलन केवल परीक्षा तक सीमित है?
क्या सभी बच्चे एक ही स्तर पर होते हैं?
  इसमें शिक्षक संदर्शिका, वर्कबुक एवं पाठ्यपुस्तक के मध्य समन्वय स्थापित करने की प्रक्रिया समझाई गई।
   नई अभ्यास पुस्तिका में किए गए परिवर्तनों, जैसे सप्ताहवार योजना के स्थान पर पाठवार योजना एवं ट्रैकर में संशोधन, पर भी प्रकाश डाला गया।
   अंततः विभिन्न आकलन विधियों के उदाहरणों के साथ सत्र का समापन किया गया।

समापन
  समस्त सत्रों के माध्यम से यह स्पष्ट हुआ कि FLN आधारित शिक्षण में गतिविधि-आधारित, छात्र-केंद्रित एवं अनुभवात्मक अधिगम की महत्वपूर्ण भूमिका है। शिक्षक की भूमिका एक मार्गदर्शक एवं सह-शिक्षार्थी के रूप में उभरकर सामने आई।
   यह प्रशिक्षण सत्र शिक्षण पद्धतियों को अधिक प्रभावी, समावेशी एवं व्यवहारिक बनाने की दिशा में अत्यंत उपयोगी एवं प्रेरणादायक रहा।

By Ripchand Sahu
( Assistant Teacher, District Korea )

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